विवरण
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यहाँ बॉनी, जेरेड और मास्टर 27 नवंबर 1993 को सैन फ्रांसिस्को में होने वाले मास्टर के सार्वजनिक व्याख्यान और दीक्षा पर चर्चा करते हैं। मास्टर श्रोताओं के प्रश्नों के उत्तर भी देती हैं, जिनमें अतीत के आत्मज्ञानी मास्टरओं की शिक्षाएँ, कर्मचक्र से परे क्या है और मृत्यु के निकट के अनुभव जैसे विषय शामिल हैं।Bonnie: तो आइए, अपने साक्षात्कार पर लौटते हैं, और आप में से बहुत लोगो ने फ़ोन कीया था वे प्रसन्न हुए थे।Jared: फ़ोन पर आए कुछ प्रश्नों पर लौटने से पहले, मास्टर, मैं आपका फिर से स्वागत करना चाहता हूँ, और हमें खुशी है कि आज सुबह आप हमारे साथ प्रसारण में हैं। (धन्यवाद।) मुझे लगता है कि बहुत से लोगों को, विशेषकर पश्चिम में, उन्हें यह लगता है कि पूर्व या एशियाई देशों और वैसे लोग अपनी आध्यात्मिकता से हम पश्चिमी लोगों की तुलना में अधिक जुड़े हुए हैं। क्या आपको लगता है कि यह सच है? क्या आपको लगता है कि औलाक (वियतनाम), या भारत या अन्य जगहों के लोग अधिक आध्यात्मिक हैं? क्या आपको लगता है कि हम सभी समान रूप से समस्याओं से ग्रस्त हैं?Master: मुझे नहीं लगता कि पूर्व और पश्चिम के बीच में बहुत अंतर है। शायद अंतर केवल कैसे लोग इसे अलग ढंग अभिव्यक्त करते हैं, क्योंकि मेरे अमेरिकी तथाकथित शिष्यों में बहुत से लोग सुंदर, निष्ठावन, और निर्मल हैं। जिस तरह वे प्यार करते हैं, उनका प्रेम सहज ही उमड़ता है। यह सुंदर है। वास्तव में, मुझे लगता है कि वे अधिक ग्रहणशील हैं यदि वे सचमुच विश्वास करते हैं, तो वे सच में प्रेममय और अधिक विश्वास करने वाले भी होते हैं। (और शायद लालसा वाले, लेकिन...) लालसा वाले, हाँ, हाँ, यही सही शब्द है। अरे, आपको उन्हें मेरे आसपास देखना चाहिए था। फिर आप रो पड़ते। वे रो पड़ते हैं। जब मैं ऐसी बात कहती हूँ जो उनके हृदय को छू ले, तो अधिक रोते हैं, उन पूर्वी लोगों से भी अधिक।Bonnie: मास्टर, जब आप सैन फ़्रांसिस्को आएँगी, तो हम निश्चित रूप से लोगों को आपसे मिलने के लिए आमंत्रित करना चाहेंगे। आप सैन फ़्रांसिस्को के पैलेस ऑफ़ फ़ाइन आर्ट्स में शाम को 7 से 10 बजे तक उपस्थित रहेंगी। शनिवार, 27 नवंबर को, और यह निःशुल्क व्याख्यान होगा। (हाँ।) इसी से मेरे मन में यह प्रश्न आता है।मास्टर, आपके व्याख्यान और दीक्षा निःशुल्क होते हैं? (हमेशा, हर समय—पहले भी, बीच में, और बाद में भी।) ठीक है, और कोई सदस्यता शुल्क की भी आवश्यकता (नहीं।) नहीं जो लोग आपका अनुसरण करते हैं, आपके शिष्यों से भी नहीं। तो, आप इतने लोगों की आर्थिक सहायता कैसे कर पाती हैं?Master: मेरा अनुमान है यह परमात्मा की सहायता है। देखिए, परमात्मा ने मुझे चित्रकारी, कलात्मक हस्तशिल्प, गायन और संगीत-रचना जैसी कुछ प्रतिभाएँ दी हैं। इनसे मुझे आर्थिक स्थिरता मिलती है, और क्योंकि मेरा जीवन बहुत सादा है, और शिष्यों के जीवन बहुत सादा है, तथा वे अपना खर्च स्वयं उठाते हैं, इसलिए, हम सब कमाते हैं वो देने में सक्षम हैं।(और आप गिरजाघरों नहीं बनाती, है ना? (नहीं।) कोई भवन?) नहीं, हम लोगों के लिए पर्याप्त बड़ा भवन कभी बना ही नहीं सकते। (ठीक है।) क्योंकि लोग बहुत ही अधिक हैं, इसलिए मैं कभी इतनी बड़ी जगह नहीं बना सकती। सही है, इसलिए हम कुछ बनाते ही नहीं।(हमने कहा था कि आत्मज्ञान, दीक्षा और आध्यात्मिकता के बारे में सुनने को लोग भूखे होते हैं। हमारे बहुत से श्रोताओ फ़ोन कर रहे हैं। मास्टर, माउंटेन ड्यू से किसी ने फ़ोन किया है, मेरे पास उनका नाम नहीं है, और पूछते हैं कि क्या आपके द्वारा या आपके बारे में लिखी कोई पुस्तक बाज़ार में उपलब्ध है?) मुझे लगता है कि वे बाज़ार में बहुत कम उपलब्ध हैं, लेकिन आप हमारे किसी भी केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। यदि वे चाहें तो आपसे पूछ सकते हैं और आप उन्हें पता दे सकती हैं। (ठीक है।) हम उन्हें हर महीने एक निःशुल्क पत्रिका, और फ्री बूकलेट्स, बहुत-सी जानकारी निःशुल्क भेज सकते हैं। लेकिन कुछ बड़ी पुस्तकें लागत पर, छपाई की लागत पर बेची जाती हैं, और ऑडियो तथा वीडियो टेप भी खाली टेप की लागत पर दिए जाते हैं।(और मैं देख रहा हूँ... क्या यह ...का एक उदाहरण है, हाँ, ठीक है, यह एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट है, और यह एक पूस्तिका है यहाँ, लगभग 60-70 पृष्ठों की, और मैं कहना चाहुंगा, इस के मुखपृष्ठ पर का सुंदर चित्र है, सुप्रीम मास्टर चिंग हाई का। और साथ ही, एक मासिक समाचार-पत्र है। यह मासिक समाचार-पत्र है। अच्छा, मैं कहूँगा कि यह बहुत प्रभावशाली मासिक समाचार-पत्र है।) (हाँ, सचमुच।) हाँ, हाँ। (सुंदर।) धन्यवाद। हम ये सब किसी को भी, बिल्कुल किसी को भी, निःशुल्क भेजते हैं।(मेनलो पार्क से फ़ोन करने वाली जूडी पूछती हैं, “मृत्यु-समीप अनुभव आपके दर्शन से किस प्रकार जुड़ते हैं? जिस व्यक्ति को मृत्यु-समीप अनुभव हुआ हो, उससे आप क्या कहना चाहेंगी?”) हाँ, मृत्यु-समीप अनुभव वास्तव में मृत्यु का ही अनुभव है, बस वह तथाकथित रजत-डोर, वह तथाकथित रजत-डोर, अभी तक टूटी नहीं होती, जो हमारी आत्मा को इस तथाकथित भौतिक साधन से जोड़ती है। तो उन्हें वास्तव में मृत्यु का अनुभव होता है। (हाँ।) और जिनका जीवन सदाचारी है और जिनका अंतःकरण शुद्ध है, वे तेजस्वी प्रकाश तथा अनेक सुंदर आयामो देखते हैं, और वह बिल्कुल सच है। यह ऐसा ही है जब आप ध्यान लगाते हैं। (हाँ।) और जब आप ध्यान लगाते हैं, अंतर केवल इतना है कि आप इस अनुभव को लंबा कर सकते हैं, या अपनी इच्छा से इसे फिर अनुभव कर सकते हैं और अधिकाधिक उच्च आयामों तक फैला सकते हैं। हाँ। इसलिए ध्यान भी मृत्यु का अनुभव है। इसीलिए, संतो कहते हैं, “मैं प्रतिदिन मरता हूँ।” (हाँ।) हाँ। (मेरा मानना है कि संत पॉल ने यह कहा था।) हाँ। आप शरीर छोड़ देते हैं, और आप उच्चतर सौंदर्यों में जाते हैं, और फिर अपनी इच्छा से लौट आते हैं। इसके लिए थोड़ा अभ्यास चाहिए। (थोड़ा अभ्यास करके?) हाँ। (हाँ, बिल्कुल।) बहुत अधिक समय नहीं लगता। कुछ लोगों को दीक्षा के समय ही यह अनुभव हो जाता है और फिर वह निरंतर बना रहता है।(जो लोग अभी सुन रहे हैं, यदि वे दीक्षा पाने की ओर आकर्षित हों, तो वे वह कैसे कर सकते हैं?) अच्छा, वे व्याख्यान में हमसे मिलने आ सकते हैं, और उसके तुरंत बाद हम उन्हें दीक्षा दे देंगे। वह भी निःशुल्क, सभी शर्तों और बंधनों से मुक्त, पूरी तरह निःशुल्क। मेरा मतलब है, किसी भी बंधन से मुक्त। वैसे कोई भी दायित्व नहीं है, सिवाय इसके कि यदि ध्यान लगाकर प्रतिदिन अधिक जानने के लिए आवेदन करना चाहते हैं।(तो आपको अपना दायाँ हाथ उठाकर किसी व्यक्ति या वस्तु के प्रति निष्ठा की शपथ नहीं लेनी पड़ती? नहीं?) नहीं, नहीं, नहीं। लेकिन बाद में कुछ नियम मानने होते हैं, क्योंकि मैं केवल शिष्यों की संख्या बढ़ाना नहीं चाहती, बल्कि उन्हें सचमुच शिक्षा देना चाहती हूँ। इसलिए, जो भी हमारे साथ बने रहना चाहे, उसे प्रेमपूर्ण नियमों का पालन करना चाहिए, जैसे वीगन आहार अपनाना और पशु-लोगों सहित किसी के प्रति हिंसा न करना। (हाँ।) तो, इसलिए, हमें बस इन नियमों का कड़ाई से पालन करना और ध्यान करना होता है। (और ध्यान करना।) हाँ।(हमारे पास एक महिला श्रोता हैं, कॉन्स्टेंस, सैन होज़े से फ़ोन कर रही हैं। वे कहती हैं कि हर मंगलवार, शाम 5 बजे टेलीविज़न चैनल 11 पर सुप्रीम मास्टर चिंग हाई के प्रवचन और प्रश्नोत्तर का रिकॉर्ड किया हुआ कार्यक्रम प्रसारित होता है। (ओह, हँ?) अच्छा, मुझे इसकी जानकारी नहीं थी। (मुझे भी नहीं।) अच्छा, यह कभी पता नहीं चलता... ) हाँ। (...पता नहीं चलता आप कहाँ दिखाई देने वाली हैं।) (मुझे लगता है इसका अर्थ सैन होज़े में टीसीआई केबलविज़न के चैनल 11 से है। हर मंगलवार, शाम 5 बजे। अच्छा, चलो सैन होज़े के श्रोताओं, आप सुप्रीम मास्टर चिंग हाई के प्रवचन और प्रश्नोत्तर का रिकॉर्ड किया हुआ कार्यक्रम देख सकते हैं। हम एक छोटा-सा विराम लेंगे, और उसके तुरंत बाद बातचीत जारी रखेंगे सुप्रीम मास्टर चिंग हाई से।)Jared: हम आपका फिर से स्वागत करना चाहते हैं। यदि आप पहले से सुन रहे हैं, तो आपका स्वागत है। और यदि आपने अभी ट्यून किया है, यह है, रेडियो 2000 का कार्यक्रम ‘सीइंग बियॉन्ड’ है। आज सुबह आपका हमारे साथ होना सुखद है, जहां हम साक्षात्कार कर रहें है, सुप्रीम मास्टर चिंग हाई के साथ। मास्टर चिंग हाई, आपका पुनः स्वागत है। हमें खुशी है कि आप हमारे साथ हैं। हमें लगातार बहुत, बहुत-से फ़ोन आ रहे हैं।और बोल्डर क्रीक से फ़ोन कर रहे रिचर्ड की ओर चलते हैं, उनका प्रश्न वास्तव में ऐसा है जिस पर, मैं भी चर्चा करना चाहता था। और रिचर्ड ईश्वर की बौद्ध अवधारणा के बारे में पूछ रहे हैं, जिसे हमने कुछ हद तक छुआ था, उनके प्रश्न का दूसरा भाग है, “कर्म और मृत्यु के चक्र से परे क्या है?”Master: केवल दो प्रश्न हैं। (हाँ, दो प्रश्न।) ठीक है।(वे वह जानना चाहता है, इश्वर की बौद्ध अवधारणा (ठीक है।) और कर्म तथा मृत्यु के चक्र से (सही।) परे क्या है।) और मृत्यु, कर्म और मृत्यु से परे? ठीक है। (हाँ।) तो, मैं पहले प्रश्न का उत्तर देती हूँ। ईश्वर की बौद्ध अवधारणा है महान चेतना। हम उसे ईश्वर कहते हैं और बौद्ध उसे कहते हैं महान चेतना या महान स्व। कभी-कभी लोग बुद्ध से पूछते थे कि वैसे क्या ईश्वर है या वैसे कोइ ईश्वर नहीं है। तब बुद्ध कहते थे, “मैं न यह कहता हूँ कि ईश्वर है, न यह कि ईश्वर नहीं है, लेकिन मैं कहता हूँ कि एक ऐसी वस्तु है जिससे सब कुछ उत्पन्न होता है और जिसमें सब कुछ लौट जाता है।” अब आप उसे से जो नाम देना चाहें, दे सकते हैं। (मुझे यह उत्तर पसंद आया।) हाँ।और फिर अब, दूसरा प्रश्न, उससे परे क्या है, पव्ह है परम ज्ञान और वह सर्वोच्च परमनंद है जिसे हमने कभी भी जाना हो। वही हमारा सच्चा साम्राज्य है क्योंकि बोने और काटने के नियम से परे, वहाँ प्रेम का नियम है। यह केवल प्रेम और परमानंद है। यदि हम कर्म के चक्र को पार कर लें, फिर उस आयाम में पहुँचते हैं, जहाँ न जीवन है, न मृत्यु, न कर्म, केवल आनंद और संतुष्टि है। लेकिन इस तरह आप से बात करते हुए मुझे लगता है कि हम इसे कुछ कमतर कर रहे हैं, क्योंकि मानवीय भाषा आसानी से गुमराह करने वाली है और बहुत सीमित है। (वैसे कुछ वस्तुएं ऐसी होती हैं जिन्हें शब्दों में व्यक्त नहीं कि जा सकती।) सही। (क्या यह सही?) सही, सही। आप यह जानते हैं। (हाँ।) अरे स्त्री और पुरुष के बीच के साधारण प्रेम को ही लीजिए, आप उसका वर्णन कैसे करेंगे? (बिल्कुल।)(अच्छा, पैसिफ़िक ग्रोव से फ़ोन कर रही शलोना केवल यह पूछती हैं, कि क्या आप किरपाल सिंह की शिक्षाओं से परिचित हैं।) हाँ, हाँ। बहुत परिचित।(अहा, अहा।) (क्या आप उसके बारे में कुछ विस्तार से बताना चाहेंगी?) वे ऐसी वस्तु सिखा रहे थे। (अहा, अहा।) मैं उनसे नहीं मिली। मैंने उनके बारे में पुस्तकें पढ़ी हैं और जानती हूँ कि उन्होंने यही चीज सिखायी।(सैन फ़्रांसिस्को से फ़ोन कर रहे... लैंग, कहते हैं कि, इस समय, जब हम प्रसारण कर रहे हैं, सैन फ़्रांसिस्को के पैलेस ऑफ़ फ़ाइन आर्ट्स में भिक्षुओं रेत का मंडल बना रहे हैं। क्या आपको इसकी जानकारी थी?) नहीं, मुझे नहीं थी। (यध्यपि, आप जानती हैं कि वह क्या होता है?) हाँ। (हाँ। बौद्ध परंपरा में रेत के मंडलों का उपयोग कैसे किया जाता है?) इनका उपयोग मुख्यतः तिब्बती परंपरा में होता है।(हाँ।)जब वे आशीर्वाद देने के लिए कोई बड़ा अनुष्ठान करते हैं या सामूहिक प्रार्थना करते हैं, विविध रंगों के साथ, बहुत सुंदर। यह केवल ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है। (जरूर। अच्छा, मास्टर, रेत की चित्रकारी या रेत के मंडल की बात से, बहुत से अन्य प्रश्नो से मुझे एक और प्रश्न याद आया। हमारे देश के मूल अमेरिकी नवाहो लोग उपचार के लिए इनका उपयोग करते हैं। क्या आप... मेरा मतलब है, बहुत से लोग ऐसी अनेक समस्याएँ लेकर आते हैं जिनका उपचार आवश्यक होता है। क्या आप स्वयं उपचारक के रूप में उनके साथ काम करती हैं?)नहीं। मैं लोगों के उपचार के लिए कोई भौतिक तरीका नहीं अपनाती। लोगों का उपचार बस अपने-आप हो जाता है। यदि यह उचित हो, यदि सही समय हो, और उनका स्वस्थ होना उचित हो, तो वे अपने-आप स्वस्थ हो जाते हैं। कभी केवल शिष्य बनने से, या कभी दीक्षा के तुरंत बाद, या कभी केवल मेरा नाम स्मरण करने से भी, उदाहरण के लिए। पर यह अति स्वमहिमा करने जैसा लगता है, इसलिए कृपया मुझे क्षमा करें। (हम आपको क्षमा करते हैं।) धन्यवाद। आपने पूछा है, इसलिए सीधे उत्तर देने के अलावा मुझे कोई और तरीका नहीं सूझा। (बिल्कुल।) हाँ। (बिल्कुल।) मुझे व्यक्ति के पास होने की आवश्यकता नहीं है। हम शारीरिक उपचार पर ध्यान केंद्रित नहीं करते, फिर भी लोग स्वस्थ हो जाते हैं। मैं इस बात पर ज़ोर देना पसंद नहीं करती। जानते हैं क्यों? क्योंकि मैं नहीं चाहती कि लोग शरीर के उपचार की नियत से आएँ, पर उन्हें परमात्मा को पाने की सच्ची लालसा के साथ आना चाहिए, जो अधिक शाश्वत है, और अधिक चिरस्थायी है, तथा वह उन्हें शारीरिक लाभ पहुँचाएगा, और मानसिक भी।(मास्टर, आपने बहुत बात की हैं, और आज आपने निश्चय ही उस के बारे में बात की है, आप जिसे ईश्वरिय विधान कहती हैं। (हाँ।) हममें से कुछ लोग शायद उसके लिए “भाग्य” शब्द का प्रयोग करें, हालाँकि मुझे लगता है कि ईश्वरिय विधान में अधिक आध्यात्मिक भाव है। (हाँ।) स्वतंत्र इच्छा के बारे में क्या कहेंगी?) स्वतंत्र इच्छा। यह वह चुनाव है जो हम भौतिक जन्म से पहले और भौतिक जीवन के दौरान करते हैं। लेकिन मृत्यु के बाद, हम तब तक चुनाव नहीं कर सकते, जब तक इस जीवन में अर्जित पुण्य हमारे पास न हो। उदाहरण के लिए, इस संसार में जन्म लेने से पहले, हमरे पास विकल्प होता है, कि हम ऐसे या ऐसे व्यक्ति बनेंगे। (हाँ।) लेकिन फिर, जब यहाँ आ जाते हैं हम उसको परिस्थितियों और समाज के मनाने के अनुसार हम उसे बदल देते हैं। (ठीक है।) और तब हम स्वतंत्र इच्छा भी खो देते हैं। हमें लगता है कि हम स्वतंत्र हैं, लेकिन हम नहीं होते।Photo Caption: "क्या यह सुंदरता आपको ईडन की याद दिलाती है?"











